देश को एक स्वस्थ कांग्रेस की जरुरत है
मुकेश तिवारी  | अपडेटेड: Thursday, May 1, 2014 at 09:55 am EST

मुकेश तिवारी - इस बार के लोकसभा चुनावों में अब तक प्राप्त जानकारियों पर नज़र डाली जाए तो लगता है कि कांग्रेस इस बार शायद अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी लेकिन ज्यादा सीटों के मामले में नहीं बल्कि कम सीटों के मामले में। इसका सबसे बड़ा सबूत उसके खुद के नेतओं द्वारा की जा रही बयानबाजी से मिलता है जो नतीजे आने से पहले ही तरह-तरह की नकारात्मक बातें कर रहे हैं। जैसे "हम अपने कामों को जनता के बीच ठीक से नहीं रख पाए। ", "हम महंगाई रोकने में नाकाम रहे। " और "प्रधानमंत्री अगर समय-समय पर अपना मुँह खोलते तो आज हालत यह नहीं होती। " आदि। लेकिन जिस बयान ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का भी मनोबल तोड़ दिया होगा वो है "कांग्रेस अपेक्षित सीटें प्राप्त न होने की दशा में मोदी को रोकने के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों को समर्थन देगी। "
इन्हीं बयानों के बीच अभी कल ही लालू प्रसाद यादव द्वारा दिया गया बयान भी काफी ध्यान देने योग्य है। एक रैली को संबोधित करने पहुंचे लालू से जब एक पत्रकार ने पूछा की उनकी रैलियों में सोनिया और राहुल क्यों दिखाई नहीं देते तो उन्होंने भड़कते हुए कहा कि "सोनिया और राहुल को यहाँ पूछता कौन है। " अभी कल तक कांग्रेस और राहुल, सोनिया की तारीफ करते नहीं थक रहे लालू के इस बयान से कई बातों की तरफ इशारा मिलता है और उसमें सबसे महत्वपूर्ण है कांग्रेस की लगातार गिरती साख की बात। इसके अलावा भी उसके कई पुराने सहयोगी पहले ही उससे किनारा कर चुके हैं।
कांग्रेस की हालत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि किसी समय तमाम दलों के निशाने पर रहने वाली पार्टी अब अन्य दलों के साथ मिलकर भाजपा और मोदी पर निशाना साध रही है। बात साफ है कि अन्य दल अब उसे उतनी बड़ी पार्टी नहीं मानते हैं और ना ही अपना प्रमुख प्रतिद्वंदी। पिछली बार के चुनावों के बाद लगा था कि कांग्रेस एक बार फिर अपनी साख बढ़ाती जा रही है लेकिन एक के बाद एक उजागर हुए घोटालों ने और कमरतोड़ महंगाई ने उस साख पर बहुत बड़ा बट्टा लगाया। रही सही कसर प्रधानमंत्री के मौन और उनके मन्त्रियों के गैरजिम्मेदाराना बयानों ने पूरी कर दी।
मीडिया के लगातार बढ़ते वर्चस्व और सुप्रिम कोर्ट द्वारा समय-समय पर लगाई गई लताड़ ने भी यूपीए सरकार और खासकर कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचाया है। अब इसे कांग्रेस की बदकिस्मती कहें या कुछ और इंटरनेट और मोबाइल के दम पर उपजी मीडिया क्रान्ती भी इसी सरकार के समय में होनी थी। कांग्रेस पर चौतरफा इतने हमले हुए हैं कि सरकार जब तक किसी एक का जवाब देती तब तक वह कई अन्य क्षेत्रों में हार चुकी होती थी। मीडिया में होते नित नए खुलासों ने पूरे देश का ध्यान सरकार की तरफ खींचा और सरकार थी कि बस बेशर्मी से अपना पल्ला झाड़ने में ही लगी रही।
सरकार में रहते हुए तमाम घोटालों में भले ही उसके सहयोगी दलों का भी हाथ रहा हो लेकिन उसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को ही उठाना पड़ा है। निश्चित है जिसकी जितनी बड़ी इज्जत होगी उसकी उतनी ही बड़ी बेइज्जती भी होगी। लेकिन कांग्रेस ने जिन दलों का साथ लिया था वो भी उतने ही बड़े घाघ थे जीतनी बड़ी कान्ग्रेस है। मलाई सबने मिल बाँट कर खाई लेकिन जब आरोप लगने लगे तो सब अपने-अपने क्षेत्रों में दुबक गए लेकिन कांग्रेस अपने विशाल आकार के कारण कांग्रेस का छुप पाना नामुमकिन था । बाकी दलों की काली करतूतें तो कुछ समय में भुला दी जाएंगी लेकिन कांग्रेस की कारस्थानियां इतनी आसानी से भूलने वाली नहीं हैं और इसका खामियाजा उसे लंबे समय तक भुगतना होगा।
कांग्रेस के प्रति उपजी इस नकारात्मकता की कोख से जन्मी आम आदमी पार्टी का आकर फिलहाल उतना बड़ा भले ही नज़र न आ रहा हो लेकिन आने वाले समय में वो देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की राह पर है। अगर ये पार्टी जितना कहती है उससे आधा भी कर दिखाने में कामयाब रही तो उसकी राह आसान हो जाएगी और कांग्रेस देश में तीसरे स्थान पर धकेल दी जाएगी। लेकिन आप को पहले कुछ स्थानों पर खुद को साबित करना होगा तभी जनता में उसके प्रति विश्वास बढ़ेगा। खाली बातों और विरोधियों पर आरोप लगाने से वो जहां पहुंच सकती थी वो पहुँच चुकी है। इससे आगे का रास्ता उसे अपने कर्मों से तय करना होगा।
राजनीतिक नकारात्मकता के इस रिक्तकाल का सबसे बड़ा फायदा नरेन्द्र मोदी ने उठाया है जिसके कारण उनका कद आज संघ और भाजपा से भी बड़ा हो गया है। उनका कद आज इतना बड़ा है कि बाहरी ही नहीं बल्कि अंदरुनी विरोध भी उनकी छवि को कोई  बड़ा नुकसान पहुँचा पाने में असमर्थ हो रहे हैं। देश में विकसित गुजरात की छवि जो मीडिया द्वारा रची गई है उसका मोदी ने भरपूर फायदा उठाया है। देश के कोने-कोने में जाकर उन्होंने अपने गुजरात मॉडल का प्रचार किया है और देश की जनता के मन में एक नई आशा का संचार किया है। देश के अन्य दल उनकी इस सकारात्मक छवि को अपनी नकारात्मक बातोँ से और बड़ा करने का काम कर रहे हैं। अब जनता इतनी भी अंधी नहीं है कि वो गुजरात दंगों को तो याद रखे और उसके बाद वहां एक भी दंगे न होने और लगातार हो रहे विकास को न देख सके।
लेकिन देश के स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ कांग्रेस का होना भी आवश्यक है। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा अनुभवी पार्टी है। वो देश की खूबियों और खामियों को अन्य दलों के मुकाबले ज्यादा अच्छे से समझती है। अगर कांग्रेस पुराने और घाघ नेताओं से किनारा कर नए और ईमानदार नेताओं को पार्टी में लाती है तो निश्चित ही देश का भविष्य संवर सकता है। किसी देश के लिए एक अच्छी सरकार की जितनी जरुरत होती है उतनी ही जरुरत एक अच्छे विपक्ष की भी होती है। भाजपा और कांग्रेस अपनी पुरानी भूमिका में तो असरदायक नहीं रहे लेकिन हो सकता है कि भूमिकाओं की अदला-बदली से सूरते-हाल भी बदल जाए।



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