सिखों का चीन में अपमान, अमेरिका चेता लेकिन भारत ने साधी चुप्पी
मुकेश तिवारी  | अपडेटेड: Thursday, Jul 24, 2014 at 05:15 am EST

मुकेश तिवारी -  चीन के वुहान में आयोजित फीबा एशिया कप बास्केटबॉल चैम्पियनशिप में भारत के दो सिख खिलाडियों को अपमान का घूँट पीने को मजबूर कर दिया गया। चीनी खेल अधिकारीयों ने नियमों का हवाला देते हुए अमृतपाल सिंह और अमज्योत सिंह को पगड़ी उतारने के लिए कहा। भारत के अमेरिकी कोच के विरोध के बावजूद अधिकारी अपनी बात पर अड़े रहे। बाद में मजबूरन दोनों खिलाडियों को देशहित में बिना पगड़ी के ही खेल में उतारना पड़ा।
इस बात को लेकर अमेरिका जैसे देश ने तो फीबा के समक्ष अपनी आपत्ति जाता दी है लेकिन देश की तथाकथित सेक्युलर पार्टियों और खुद को देशभक्त कहने वाली पार्टियों के मुंह पर अभी भी ताले पड़े हुए हैं। नई दिल्ली के महाराष्ट्र भवन में एक रोज़ेदार के साथ हुई बदसलूकी को लेकर वर्तमान केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला किया जा रहा है। संसद की कार्यवाही बाधित की जा रही है। निश्चित ही इस तरह की हरकत किसी भी सूरत में बर्दाश्त करने लायक नहीं है लेकिन देश बाहर जो खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो देश के सम्मान के वाहक हैं उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ ऐसी बदसलूकी क्या माफ़ करने लायक है।
चीन अपनी शक्ति के दंभ में भारत को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। चाहे वो भारतीय सीमा का जब चाहे अतिक्रमण करना हो, सिक्किम के लोगों और खिलाडियों को यह कहकर वीज़ा देने से इंकार करना हो कि वे तो उसके ही नागरिक हैं। चीन की अपमानित करने की इस परंपरा के खिलाफ सरकार के साथ-साथ हर हिन्दुस्तानी को मोर्चा खोलना होगा।
इन्हीं खिलाडियों ने मार चीन के मुंह पर तमाचा
चीन के मुंह पर यही भारतीय टीम जिस अंदाज़ में तमाचा जड़ कर लौटी है उससे हमारे नेताओं को कुछ सबक लेना चाहिए। भारतीय टीम ने इतिहास में पहली बार बास्केटबॉल के खेल में चीन को मात दी है और उसमें भी इन दोनों सिख खिलाडियों का प्रदर्शन लाजवाब रहा है। खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही चीनी टीम इस सदमे से उबर नहीं पाई और टूर्नामेंट के फायनल में भी नहीं पहुँच सकी। खिलाडियों  ने तो खेल में जवाब देकर चीन को अपनी 'सरदारी' दिखा दी है। अब बारी हमारे जनप्रतिनिधियों और संसद की है जिसे एकसुर में चीन की इस नापाक हरकत की भर्त्सना करनी चाहिए।
हर वाजिब-गैरवाजिब मुद्दे पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे भारतीय राजनीतिक दलों को कम से कम देश के सवाल पर तो एकजुट हो जाना चाहिए। कुछ नहीं तो चीन से ही बहुत कुछ सीखा जा सकता है जो अपने राष्ट्रीय सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करता और अमेरिका जैसी शक्ति को भी धमकाने से नहीं चूकता। जब तक हम देश के नागरिकों में राष्ट्रीयता और आत्मसम्मान पैदा नहीं कर पाएंगे तब तक देश का सही मायने में विकास असंभव है।
पूरा वाकया क्या है
भारतीय बॉस्केटबॉल टीम के दो अमृतपाल सिंह और अमज्योत सिंह से चीन में हुए पांचवें फीबा एशिया कप में मैच से पहले उनकी पगड़ी उतरवाई गई। 12 जुलाई को जापान के खिलाफ मैच शुरू होने से पहले इन दोनों खिलाड़ियों से कहा गया कि वे पगड़ी उतार दें, क्योंकि खेल के नियमों के मुताबिक वे पगड़ी पहनकर मैच नहीं खेल सकते। फेडरेशन के आर्टिकल 4.4.2 के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी ऐसी चीजें नहीं पहन सकता, जिससे किसी के घायल होने का डर हो। सिर पर पहनी जाने वाली चीजों और आभूषण की अनुमति नहीं है।
पगड़ी उतारी, तभी मिली इजाजत
भारत के अमेरिकी कोच स्कॉट फ्लेमिंग का पगड़ी के साथ खिलाड़ियों को खेलने देने का आग्रह भी अनसुना कर दिया गया । इन दोनों सिख खिलाड़ियों को खेलने की इजाजत तभी मिली, जब उन्होंने अपनी पगड़ी उतारी। बाकी सभी 6 मैचों में इन खिलाड़ियों को पगड़ी पहनने की इजाजत नहीं मिली।
खिलाड़ियों की व्यथा
हम हमेशा पगड़ी पहनी रखकर ही खेले हैं। पिछले साल मनीला में एशियाई चैंपियनशिप में और हाल ही में गोवा में आयाजित लुसोफोनिया गेम्स में भी पगड़ी के साथ मैच खेले थे। -अमृतपाल सिंह, बॉस्केटबॉल खिलाड़ी
मैं पहली बार बगैर पगड़ी के मैच खेला। पगड़ी मेरे शरीर का हिस्सा है। जब अधिकारियों ने हमसे कहा कि हम पगड़ी के साथ नहीं खेल सकते तो हमें बहुत बुरा लगा। लेकिन टीम के लिए हमने बगैर पगड़ी के खेलने का फैसला किया। -अमज्योत सिंह, बॉस्केटबॉल खिलाड़ी
अमेरिका ने जताया विरोध
इस मामले को लेकर भारत में भले ही सून-सपाटा पड़ा हो लेकिन अमेरिका ने इस माले में अपना कड़ा ऐतराज जताया है। फीबा को भेजे एक पत्र में अमेरिकी सांसदों ने साफ़ किया है कि जिस नियम का हवाला देकर खिलाडियों को अपमानित किया गया है, उसके अनुसार खिलाड़ी किसी भी ऐसे वस्त्र या आभूषण धारण नहीं कर सकते जिससे खेल के परिणाम पर असर और अन्य खिलाडियों को नुकसान पहुंचता हो।
अंतरराष्ट्रीय बास्केट बॉल संघ (फीबा) के अध्यक्ष वाई मेनिनी को लिखे पत्र में कहा गया, हम उन खबरों को लेकर चिंतित हैं, जिनमें ये संकेत मिल रहे हैं कि सिख खिलाड़ी पगड़ी पहनकर फीबा के खेल नहीं खेल सकते। जबकि पगड़ी उनके धर्म के अनुसार जरूरी है। हम आपसे आपकी भेदभावपूर्ण नीति को बदलने के लिए कहते हैं। कांग्रेस सदस्य जो क्राउले के नेतृत्व में यह पत्र बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस में वितरित किया गया। भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस सदस्य एमी बेरा ने उप प्रमुख के रूप में इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में बाकायदा उदाहरण के साथ यह भी साफ़ किया गया कि आज तक कई सिख खिलाड़ी पगड़ी धारण कर खेले हैं लेकिन इससे किसी कोई कोई नुकसान पहुंचा हो ऐसा कभी न देखने में आया है न सुनने में। पत्र में दर्शप्रीत सिंह का उदाहरण दिया गया, जिसने ट्रिनिटी विश्वविद्यालय में बास्केटबॉल टीम की कप्तानी की और नेशनल कॉलिजिएट एथलेटिक एसोसिएशन में अपने पूरे सफल करियर के दौरान पगड़ी पहने रखी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फीफा) ने हाल ही में अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए सिखों को फुटबॉल खेलने के दौरान पगड़ी पहनने की अनुमति दी है। पत्र में कहा गया, महासचिव जे वाल्के ने फैसले की घोषणा करते हुए कहा, आप भेदभाव नहीं कर सकते।



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