जॉन कैरी की भारत यात्रा: क्या-क्या उम्मीदें हैं सैम साहब की
मुकेश तिवारी  | अपडेटेड: Thursday, Jul 31, 2014 at 03:23 am EST

मुकेश तिवारी - अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी इन दिनों भारत की यात्रा पर आये हुए हैं । वे पांचवे भारत-अमेरिका रणनीतिक वार्ता के लिए आये हुए हैं । गुरूवार को होने वाली इस बैठक में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ कैरी वार्ता की सह-अध्यक्षता करेंगे। इसमें गृह और रक्षा सहित अन्य मंत्रालयों के भी वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसमें केन्द्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) निर्मला सीतारमण भी भाग लेंगी। वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।
उनके साथ आया भरी-भरकम प्रतिनिधिमंडल इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत की नव-निर्वाचित सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापर और विकास को लेकर बेहतर समझ ने विशाल भारतीय बाजार में अमेरिकी कंपनियों के लिए उम्मीद के नए दरवाजे खोल दिए हैं । इस यात्रा का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इसके पहले की यात्राओं में भारतीय मीडिया यही राग आलापति थी कि 'भारत, अमेरिका से क्या फायदा उठा सकता है ?' लेकिन अब यह स्थिति पलट गई है और सभी यह कयास लगा रहे हैं कि 'अमेरिका अब हमसे क्या फायदा लेना चाहता है ?'
भारत अमेरिका के संबंधों में कभी वो तेजी और मिठास नहीं आ पाई जो भारत और रूस के बीच दिखाई देती है । अमेरिका के लिए भारत कई मायनों में महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकता है और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए यह जरुरी भी हो गया है कि क्षेत्र में शक्ति संतुलन स्थापित करने लिए भारत को और अधिक मजबूत और शक्तिशाली बनाया जा सके । अमेरिका भारत को चीन विरोधी खेमे में शामिल करने की कोशिश करता रहा है लेकिन मोदी के चीन प्रेम को देखते हुए ऐसा होना मुश्किल लग रहा है क्योंकि मोदी खुद चीन के काम समय विकास के मुरीद हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए कई बार चीन की यात्रा कर चुके हैं ।
अमेरिका रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है और इन बैठकों में उसका जोर इन्हीं मुद्दों पर अधिक रहेगा । अमरीका के साथ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक समझौते के बावजूद अमरीकी कंपनियों को भारत ने बड़े ठेके नहीं दिए हैं। अमरीका को नई सरकार से आशा है कि परमाणु ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग और बढ़े। इसलिए अमरीकी रक्षा मंत्री अगले महीने भारत के दौरे पर आ रहे हैं।
इसके साथ ही अमेरिका की यह भी कोशिश होगी कि ऊर्जा, व्यापार और निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत अपने दरवाजे खोले और निवेश के रस्ते सरल बनाए । आर्थिक माहौल में सुधार से अमरीका के निजी क्षेत्र से पूँजी भारत में आने की पूरी उम्मीद है। नई सरकार ने रक्षा के क्षेत्र में 49 फीसदी विदेशी निवेश का प्रस्ताव मंज़ूर किया है। अमरीका समेत तमाम विदेशी कंपनियों के लिए ये एक अच्छी ख़बर है।
अपने व्यापारिक हितों को साधने के लिए अमेरिका भारत और विशेष कर मोदी के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश भी करेगा। उल्लेखनीय है कि २००२ के गुजरात दंगों के बाद अमेरिका ने २००५ में मोदी का वीज़ा अस्वीकार कर दिया था लेकिन हालिया लोकसभा चुनावों में मिली भारी जीत ने अमेरिकी राष्ट्रपती बराक ओबामा को मोदी को न्यौता देने को मजबूर कर दिया है । मोदी ने इसे स्वीकार कर लिया है और वे सितंबर में वहां जाने की वाले हैं । यह बैठक उसी दौरे की रूपरेखा तैयार करेगी जिसमें कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समझौते किये जा सकते हैं ।
इस वार्ता को भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले 2 सालों के दौरान अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में ठहराव देखने को मिला है। इस दौरान अमेरिका एवं भारत के बीच कारोबारी संबंध भी आगे नहीं बढ़ पाए और अमेरिकी कंपनियों को भारत में अपने कारोबारी विस्तार को लेकर कुछ शिकायतें रही हैं। इसके अलावा पिछले साल दोनों देशों के बीच कुटनीतिक तनाव की वजह से संबंधों में खटास देखने को भी मिली।
अमेरिका ने भारत के बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, शिक्षा, कौशल विकास समेत कई क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी की इच्छा जताई है। भारत के लिए भी अमेरिकी सहयोग काफी महत्वपूर्ण साबित होगा और विश्व की इतनी बड़ी शक्ति को अनदेखा करना नासमझी ही कही जाएगी । लेकिन अपने हितों को ताक पर रखकर किसी भी तरह का समझौता भारत के लिए आने वाले समय में भरी पड़ सकता है । भारत को बिना दबाव में आये बिना इस बात को समझना होगा कि जितनी जरुरत हमें अमेरिका की है उतनी ही जरुरत उसे हमारी भी है । जरुरत इस बात की है कि हम अपनी वर्त्तमान स्थिति को देखते हुए ही कोई रणनीति बनाए और उस पर पूरे आत्मबल के साथ आगे बढ़ें ।



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