
 स्कारब्रो में तमिल समाचारपत्र पर हमला
-रविवार फरवरी २१, २०१० - जब कुला सेलाथुराई उथायन समाचार पत्र के कार्यालय में पहुँचे तो सामने खिड़की तहस-नहस हो चुकी थी जैसे किसी ने वाहन से टक्कर मारी हो।
सेलाथुराई ने कहा कि कल रात को समाचार के संपादक को धमकी भरे फोन आते रहे और एक घंटे के बाद मारखम रोड और प्रोग्रैस रोड, हाईवे ४०१ के पास इसके कार्यालय को तहस नहस कर दिया गया।
घटनास्थल ने पुलिस ने कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा की अभी जाँच चल रही है।
सेलाथुराई कैनेडा-श्री लंका बिज़ेनेस काउंसिल और यूनाईटिड तमिल काउंसिल ऑफ़ कैनेडा के अध्यक्ष हैं और हाल ही में उनकी श्री लंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के साथ भेंट हुई थी। अनुमान है कि इस हमले का भी यही कारण है।
इस भेंट का समाचार उथायन समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ था जो कि टोरोंटो के श्री-लंका से आए लोगों में लोकप्रिय है।
सेलाथुराई ने बताया कि समाचार पत्र के संपादक लोगन लोगेंद्रलिंगम को धमकी में कहा गया, "तुम्हारा दोस्त जाकर राष्ट्रपति से मिला है, अब तुम जाकर देखो कि तुम्हारी दुकान की क्या दशा है।"
जब लोगेंद्रलिंगम घटनास्थल पर पहुँचे तो देखा कार्यालय का सामने का भाग पूरी तरह तोड़ दिया गया है।
पुलिस और लोगेंद्रलिंगम ने हानि का अनुमान नहीं लगा पाए हैं।
सेलाथुराई श्री लंका में वो धनराशि देने गए थे जो कैनेडा के श्री लंका के लोगों ने हाल की घटनाओं में अनाथ हुए बच्चों और शरणार्थियों के लिए इकट्ठी की थी। राष्ट्रपति से भेंट भी इसी संदर्भ में हुई थी। सेलाथुराई ने कहा था कि यह भेंट बहुत सकारात्मक थी और राष्ट्रपति ने वादा किया था कि वह देश में जातिवाद की समस्या के निदान के लिए काम करेंगे।
सेलाथुराई ने कहा कि तोड़फोड़ करने वाले तत्व लोगेंद्रलिंगम को संदेश देना चाहते हैं कि वह राष्ट्रपति का संदेश प्रकाशित न करे।
"हम लोग कैनेडा में शांतिपूर्वक रहने के लिए आए हैं, और अगर हम अपने आपको अभिव्यक्त नहीं कर सकते.... तो हम यहाँ क्यों आए हैं।"
सेलाथुराई ने उथायन को एक निष्पक्ष समाचारपत्र बताया और कहा कि इसमें तमिल और मुख्यतः सिंहल सरकार, दोनों के समाचार प्रकाशित होते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम तमिलों के और उनके संघर्ष के विपक्ष में नहीं हैं।"
सेलाथुराई ने कहा कि समाचार पत्र को पहली बार हानि पहुँचायी गई है। परन्तु जब तमिल समाज ने यहाँ पर स्वतंत्र तमिल देश की श्री लंका में स्थापना के लिए लोकमत किया था तो जीटीए की तीन दुकानों में से उथायन समाचार पत्र उठा लिया गया था और उसके स्थान पर लोकमत समर्थक पर्चे रख दिए गए थे।
संपादक लोगेंद्रलिंगम ने कहा कि उस समय समाचारपत्र को रोष में हटाया गया था क्यों की लोकमत कि कवरेज़ को पर्याप्त स्थान नहीं मिला था।