
  उदास है धर्मनगरी का दिल
खडा घंटाघर उनके पास अपनी उदासी की कहानी बयां कर रहा .... बृहस्पतिवार को हरकी पैडी स्थित ब्रह्मकुंड पर लाखों श्रद्धालु मां गंगा मैया से आशीष ले रहे थे, तो वहां खडा घंटाघर उनके पास अपनी उदासी की कहानी बयां कर रहा था। यहां स्नान घाटों पर रंग-रोगन जरूर था, लेकिन घंटाघर की दीवारों पर धूल की परत साफ दिख रही थी। इतना ही नहीं उस पर लगाई गई चारों घडियां भी बंद थी, जो धर्मनगरी के दिल की धडकने बंद होने का अहसास करा रही थीं। आस्था की चादर खसोटते रहे भिखारी
हरिद्वार। आस्था के इस अनूठे संगम के दर्शन में हर की पैडी से कुशावर्त घाट तक भिखारियों की भीड नोचती-खसोटती रही। लगभग सभी मौकों पर पुलिस मूक दर्शक बनी रही। मेला प्रशासन का दावा था कि हर की पैडी क्षेत्र को भिखारी मुक्त किया जाएगा। दावे को पूरा करने के लिए कई बार अभियान भी पुलिस ने छेडा। लेकिन उसके बावजूद हर की पैडी क्षेत्र को पूरी तरह भिखारी मुक्त नहीं किया जा सका। गंगा के प्रति क्रेजी दिखा युवा मन हरिद्वार। कंप्यूटर और मोबाइल से चिपके रहने वाले युवाओं में मां गंगा व भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था भी कम नहीं है। महाकुंभ के पहले स्नान पर हजारों युवाओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। युवाओं ने इस अवधारणा को भी गलत साबित कर दिखाया कि आज का युवा धर्म, संस्कृति और आस्था से दूर है।
नहीं करनी पडी ज्यादा मशक्कत हरिद्वार: रेलवे और रोडवेज की तैयारियों के मुताबिक महाकुंभ के पहले स्नान पर श्रद्धालुओं की आमद कम रहने से व्यवस्थाएं बनाने को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पडी। श्रद्धालुओं की भीड को नियंत्रित करने के लिए स्टेशन परिसर में खोले गए मेला टिकट काउंटरों पर भी अपेक्षित भीड नहीं दिखी। हालांकि स्टेशन पर साफ-सफाई और सुरक्षा-व्यवस्था दुरुस्त दिखी। दोपहर बाद जरूर कुछ रेलगाडियों से यात्रियों की आमद हुई। मौसम ने भी खूब निभाया वादा
हरिद्वार: तीर्थनगरी का मौसम सुहावना होने से मकर संक्रांति पर गंगा स्नान को आए श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना नहीं करना पडा। सुबह से निकली धूप से जहां श्रद्धालुओं को ठंड और ठिठुरन से राहत मिली, वहीं मौसम खुशगवार होने से मेला प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। गुरुवार को न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री और अधिकतम तामपान 21.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। देख तमाशा दस-दस का.. हरिद्वार : दस के इस तमाशे की शुरुआत रेलवे और बस स्टेशन से शुरू हुई रिक्शे वाले ने यहां से शिवमूर्ति चौक तक के दस रुपये लिए तो आटो वाले ने ललताराव तक के। पैदल चलकर श्रद्धालु जब सुभाष घाट पहुंचे तो वहां बिक रहे फूल दस रुपये के थे। स्नान-ध्यान कर जब आगे बढे तो पूजा अर्चना और संकल्प के एवज में पंडित जी ने भी दस रुपये लेना ही मुनासिब समझा। पर ये क्या पंडित जी का आशीर्वाद तो बचा ही रह गया। लिहाजा आशीर्वाद स्वरूप भी उन्होंने दस रुपये ही लिए तो दस रुपये में ही तिलक-चंदन का कार्यक्रम चल रहा था। हर की पैडी से जब बाहर निकले तो चलते-फिरते ज्ञान देने वाले ज्ञान और .