कुंभ का पहला शाही स्नान 12 फरवरी को
कुंभ का पहला शाही स्नान ....
महाकुंभके पहले शाही स्नान पर वैरागी अखाडे शामिल नहीं होंगे। सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए वैरागियोंकी पूरी फौज इस दौरान वृंदावन में डेरा डालेगी। पहला स्नान वैरागियोंका वृंदावन में ही होगा। वहां पर बसंत पंचमी के दिन ध्वजारोहण और 28फरवरी को समापन होगा।

इसके बाद वैरागियोंकी तीनों अणियांऔर अठारह अखाडों का लाव-लश्कर कुंभ स्नान के लिए तीर्थनगरीहरिद्वार के लिए रवाना होगा।

मान्यता है कि वैरागियोंमें चार प्रमुख अणियांहुआ करती थीं। इनमें एक द्विविदके नाम से अणि थी। द्विविदको अपनी शक्तिकाघमंड हो गया और वह अत्याचारीहो गया। इससे क्रोधित होकर भगवान बलराम ने वृंदावन में हल से उसका वध कर दिया। इस तरह से द्विविदके अत्याचार से सभी को मुक्तिमिलीऔर अणियोंका चतुष्कोण टूटकर तीन अणियोंमें तब्दील हो गया। उसी समय यह तय हुआ था कि हरिद्वार और प्रयाग में जब-जब कुंभ का आयोजन होगा, उसी बीच में वृंदावन में वैरागियोंका भी कुंभ होगा।

हरिद्वार में महाकुंभका आयोजन चौदह जनवरी के स्नान पर्व से शुरू हो रहा है। इसी बीच वृंदावन में वैरागियोंके कुंभ की शुरुआत हो रही है। वैरागियोंका वृंदावन में बसंत पंचमी यानि20जनवरी को ध्वजारोहण होगा। फिर वैरागियोंकी देश भर की सारी जमातें यहीं अखाडा जोडेंगी। 28फरवरी तक वैरागी अखाडे वृंदावन में ही रहेंगे। ऐसे में तीर्थनगरीमें होने वाले पहले शाही स्नान यानि12फरवरी को वैरागी अखाडे स्नान में शामिल नहीं हो सकेंगे।

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