१६0 कंपनियों में घोटाले उजागर
भला हो पिछले साल लागू चेतावनी प्रणाली का जिससे सरकार को १६0 कंपनियों में वित्तीय अनियमितताओं का पता चला है जिनमें ३0 सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां शामिल है। पिछले साल सत्यम कंम्प्यूटर में १0,000 करोड़ रू. घोटाला सामने आने के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने सिंतबर में कारपोरेट घोटाले पता लगाने के लिए चेतावनी प्रणाली ईडब्ल्यूएस विकसित की।
साटवेयर आधारित घोटाला पता लगाने की प्रणाली कंपनी मामलों के मंत्रालय द्वारा तय १0 वित्तीय पैमानों के आधार पर कंपनियों की जांच करती है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि हमने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से चेतावनी प्रणाली के शुरूआती निष्कर्षों के आधार पर करीब १३0 कंपनियों के खातों की जांच करने के लिए कहा और करीब ३0 सरकारी कंपनियों का मसला भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के पास भेजा गया। मंत्रलय के सूत्र ने कहा कि ईडब्ल्यूएस ने कंपनियों द्वारा अपनी ही सहयोगी कंपनियों और कुछ अन्य कंपनियों को धन का हस्तांतरण किए जाने और संतुलन पत्र में अनियमितता और बेमेल परिसंपत्ति एवं देनदारी अनुपात का पता लगाया। अधिकारी ने बगैर कंपनी का नाम बताए कहा कि कुछ आले दर्जे की कंपनियां भी है जिनके खिलाफ चेतावनी जारी की गई है और हम जांच कर रहे है। मंत्रालय के सूत्र ने बताया कि ईडब्ल्यूएस के तहत कंपनियों के तिमाही नतीजे, उनकी सार्वजनिक घोषणाएं स्टाक एक्सचेंज को भेजी गई सूचनाएं कर रिटर्न, मीडिया रिपोर्ट आदि की जांच की जाती है। सत्यम जैसे घोटाले जिसका पता बरसों तक नहीं चल पाया था, की जांच के लिए इस प्रणाली की उपयोगिता के बारे में कंपनी मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि मैं इसे चिकित्सा जांच की तरह देखता हूं लिपिड प्रोफाईल ठीक नहीं है तो आपको तुरंत सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ईडब्ल्यूएस का उद्देश्य है सबकी जांच करने के लिए एक स्थाई प्रणाली विकसित करना।


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